जीरो एफआईआर (Zero FIR) का अधिकार

देश में कहीं भी शिकायत दर्ज़ करें (BNSS Sec 173)

क्या है? अपराध चाहे किसी भी शहर या जगह पर हुआ हो, आप भारत के किसी भी पुलिस स्टेशन में जाकर FIR दर्ज़ करवा सकती हैं। पुलिस यह नहीं कह सकती कि "यह हमारे इलाके का मामला नहीं है।" पुलिस को तुरंत 'Zero FIR' (नंबर '00') दर्ज़ करके उसे सही थाने में भेजना ही होगा।

ऑनलाइन / ई-एफआईआर (e-FIR) का अधिकार

नए BNSS कानून के तहत सबसे बड़ी ताकत

क्या है? अगर आप किसी कारणवश पुलिस स्टेशन जाने में असमर्थ हैं (डर या संकोच के कारण), तो नए कानून के तहत आप अपनी शिकायत इलेक्ट्रॉनिक संचार (जैसे ईमेल या व्हाट्सएप) के माध्यम से थाने भेज सकती हैं। पुलिस को इसे स्वीकार करना होगा। बस आपको 3 दिन के भीतर थाने जाकर उस पर अपने हस्ताक्षर (Sign) करने होंगे।

पीछा करना और ताक-झांक (Stalking & Voyeurism)

BNS Section 72 & 73

क्या है? अगर कोई व्यक्ति आपके मना करने के बावजूद आपका बार-बार पीछा करता है, आपसे बात करने की कोशिश करता है, या इंटरनेट (सोशल मीडिया/ईमेल) पर आपकी जासूसी करता है, तो यह एक गंभीर अपराध है।

पहचान गुप्त रखने का अधिकार (Right to Anonymity)

सुप्रीम कोर्ट की सख्त गाइडलाइन्स

क्या है? यौन उत्पीड़न, रेप या छेड़छाड़ की शिकार किसी भी महिला या बच्ची का नाम, फोटो, पता या कोई भी ऐसी जानकारी जिससे उसकी पहचान उजागर हो सके, मीडिया, पुलिस या सोशल मीडिया पर छापना सख्त वर्जित है। अगर कोई ऐसा करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और जेल हो सकती है। आप बिना अपनी पहचान बताये भी शिकायत दर्ज़ करा सकती हैं।

आत्मरक्षा का अधिकार (Right to Private Defense)

BNS Section 34 से 44

क्या है? अगर आप पर कोई जानलेवा हमला होता है, एसिड अटैक की कोशिश होती है, या रेप/किडनैपिंग का प्रयास होता है, तो कानून आपको अपनी जान बचाने के लिए हमलावर को चोट पहुँचाने (यहाँ तक कि उसकी जान लेने तक) का पूरा अधिकार देता है। ऐसे मामले में लड़की को 'हत्या' या 'हमले' की कोई सज़ा नहीं होती।

सूर्यास्त के बाद गिरफ़्तारी से बचाव

CrPC Section 46(4) / BNSS

क्या है? पुलिस किसी भी महिला को सूर्यास्त (Sunset) के बाद और सूर्योदय (Sunrise) से पहले गिरफ्तार नहीं कर सकती। इसके साथ ही, महिला की तलाशी केवल एक महिला पुलिस अधिकारी (Female Officer) द्वारा ही ली जा सकती है, वह भी पूरी शालीनता और पर्दें (Decency) का ध्यान रखते हुए।

देर से शिकायत दर्ज़ कराने का अधिकार

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

क्या है? बहुत बार डर, समाज के दबाव या सदमे (Trauma) के कारण लड़कियां तुरंत शिकायत नहीं कर पाती हैं। कानून कहता है कि यौन अपराधों के मामलों में अगर शिकायत दर्ज़ कराने में महीनों या सालों की भी देरी (Delay in FIR) हुई है, तो भी पुलिस आपकी शिकायत दर्ज़ करने से मना नहीं कर सकती। आपको बस देरी का जायज़ कारण बताना होगा।

मुफ़्त और तुरंत मेडिकल सहायता का अधिकार

Private & Govt Hospitals Rule

क्या है? रेप या एसिड अटैक की स्थिति में, देश का कोई भी अस्पताल (चाहे वह प्राइवेट हो या सरकारी) आपको मुफ़्त और तुरंत मेडिकल फर्स्ट-एड देने से मना नहीं कर सकता। अस्पताल प्रशासन यह नहीं कह सकता कि "पहले पुलिस केस (FIR) दर्ज़ करा कर लाओ।" उनका पहला कर्तव्य आपकी जान बचाना है।

मुफ़्त कानूनी सहायता (Free Legal Aid)

संविधान के अनुच्छेद 39A के तहत, अगर किसी महिला के पास वकील की फीस देने के पैसे नहीं हैं, तो यह उसका मौलिक अधिकार है कि सरकार उसे मुफ़्त वकील (Free Legal Counsel) उपलब्ध कराए। आप किसी भी कोर्ट की 'लीगल सर्विस अथॉरिटी' में जाकर या 15100 (NALSA) डायल करके इसकी मांग कर सकती हैं। न्याय पैसों का मोहताज नहीं है।